शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ काली मंत्र
ॐ अशोकवनिकाच्छेत्रे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपवन-विध्वंसक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
रावण की अशोक वाटिका को नष्ट-भ्रष्ट करने वाले को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ आपदुद्धारणभैरवाय नमः।
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये परमात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
आलिङ्ग्य देवीं हरितां निषण्णां परस्परश्लिष्ट कटौ निविश्य । सन्ध्यारुणं पाशसृणीं वहन्तं भयापहं शक्ति गणपतिमीडे ॥
ॐ हरये नमः
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
ॐ अनीश्वराय नमः