शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भद्रकाली मंत्र
भद्रकाली महाकाली किलिकिले फट् स्वाहा
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारअघोर / उग्र साधना मंत्र
स्वरूपभद्रकाली
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
मंगलकारी (भद्र) और संहारक (महाकाली) देवी सभी बाधाओं को नष्ट करें (फट्)।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
काल-भय से मुक्ति, घोर तंत्र-बाधा का नाश
विस्तृत लाभ
काल-भय से मुक्ति, घोर तंत्र-बाधा का नाश।
जप काल
अष्टमी या चतुर्दशी की रात्रि को।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
एकदन्तं महाकायं तप्तकाञ्चनसन्निभम् । लम्बोदरं विशालाक्षं वन्देऽहं गणनायकम् ॥
ॐ योगीशफलदायिन्यै नमः
ॐ इन्दुशीतलायै नमः
ॐ हरये नमः
ॐ शरण्याय नमः
मुनीन्द्रवृन्दवन्दिते त्रिलोकशोकहारिणि प्रसन्नवक्त्रपङ्कजे निकुञ्जभूविलासिनि। व्रजेन्द्रभानुनन्दिनि व्रजेन्द्रसूनुसङ्गते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥ मुनीन्द्र-वन्दिते (ऋषियों द्वारा वंदित)