शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
सप्तमुखी हनुमान कवच दिग्बन्ध मंत्र
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः इति दिग्बन्धः॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारदिग्बन्ध / तांत्रिक कीलन मंत्र
स्वरूपसप्तमुखी हनुमान
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
इन छह अमोघ बीजाक्षरों के माध्यम से मैं सभी दिशाओं को अपने साधना-स्थल के चारों ओर बांधता (सुरक्षित करता) हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
साधना काल में दसों दिशाओं से किसी भी प्रकार की नकारात्मक या आसुरी शक्तियों का प्रवेश रोकना
विस्तृत लाभ
साधना काल में दसों दिशाओं से किसी भी प्रकार की नकारात्मक या आसुरी शक्तियों का प्रवेश रोकना 15।
जप काल
सप्तमुखी कवच पाठ के आरंभ में, चारों ओर चुटकी बजाकर या जल छिड़क कर।
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