मङ्गल चण्डिका स्तोत्र मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं सर्वपूज्ये देवि मङ्गलचण्डिके ऐं क्रूं फट् स्वाहा॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इस मंत्र से क्या होगा?
इसे कल्पतरु माना गया है
विष्णु और ब्रह्मा ने भी अभीष्ट सिद्धियों हेतु इसका जप किया था 56
मंगल दोष शांति हेतु विशेष फलदायी
विस्तृत लाभ
इसे कल्पतरु माना गया है। विष्णु और ब्रह्मा ने भी अभीष्ट सिद्धियों हेतु इसका जप किया था 56। मंगल दोष शांति हेतु विशेष फलदायी।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कराल-वदनां घोरां मुक्त-केशीं चतुर्भुजाम्। कालिकां दक्षिणां दिव्यां मुण्ड-माला विभूषिताम्। सद्यः-छिन्न-शिरः-खड्ग-वामाधोर्ध्व-कराम्बुजाम्। अभयं वरदञ्चैव दक्षिणोर्ध्वाधः-पाणिकाम्॥
ॐ ऋषिप्रवरवन्द्याय नमः
दुर्गेष्वटव्याजिमुखादिषु प्रभुः पायान्नृसिंहोऽसुरयूथपारिः
ॐ मान्याय नमः
ॐ शिवस्वामिने नमः
मखेश्वरि क्रियेश्वरि स्वधेश्वरि सुरेश्वरि त्रिवेदभारतीश्वरि प्रमाणशासनेश्वरि। रमेश्वरि क्षमेश्वरि प्रमोदकाननेश्वरि व्रजेश्वरि व्रजाधिपे श्रीराधिके नमोऽस्तु ते॥