शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
दक्षिणा काली ध्यान मंत्र
ॐ कराल-वदनां घोरां मुक्त-केशीं चतुर्भुजाम्। कालिकां दक्षिणां दिव्यां मुण्ड-माला विभूषिताम्। सद्यः-छिन्न-शिरः-खड्ग-वामाधोर्ध्व-कराम्बुजाम्। अभयं वरदञ्चैव दक्षिणोर्ध्वाधः-पाणिकाम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारध्यान मंत्र
स्वरूपदक्षिणा काली
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
भयंकर मुख वाली, मुक्त केशों वाली, चतुर्भुजी, मुण्डमाला धारिणी, जिनके बाएँ हाथों में मस्तक-खड्ग है, तथा दाएँ हाथों में अभय-वर मुद्रा है, उन दक्षिणा कालिका का मैं ध्यान करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
ध्यान में देवी के उग्र और दयालु रूप का प्रकटीकरण
विस्तृत लाभ
ध्यान में देवी के उग्र और दयालु रूप का प्रकटीकरण।
जप काल
जप आरंभ करने से पूर्व मानस-दर्शन हेतु।
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