दक्षिणा काली ध्यान मंत्र
ॐ कराल-वदनां घोरां मुक्त-केशीं चतुर्भुजाम्। कालिकां दक्षिणां दिव्यां मुण्ड-माला विभूषिताम्। सद्यः-छिन्न-शिरः-खड्ग-वामाधोर्ध्व-कराम्बुजाम्। अभयं वरदञ्चैव दक्षिणोर्ध्वाधः-पाणिकाम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
भयंकर मुख वाली, मुक्त केशों वाली, चतुर्भुजी, मुण्डमाला धारिणी, जिनके बाएँ हाथों में मस्तक-खड्ग है, तथा दाएँ हाथों में अभय-वर मुद्रा है, उन दक्षिणा कालिका का मैं ध्यान करता हूँ।
इस मंत्र से क्या होगा?
ध्यान में देवी के उग्र और दयालु रूप का प्रकटीकरण
विस्तृत लाभ
ध्यान में देवी के उग्र और दयालु रूप का प्रकटीकरण।
जप काल
जप आरंभ करने से पूर्व मानस-दर्शन हेतु।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ श्रीगोपालाय नमः
ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं क्रीं क्लीं श्रीं महालक्ष्मी मम गृहे धनं पूरय पूरय चिंतायै दूरय दूरय स्वाहा।
श्री राम राम रामेति रमे रामे मनोरमे। सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने॥
ॐ कुलजायै नमः
ॐ दृढव्रताय नमः
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥