शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ काली मंत्र
ॐ कारणार्णवसम्मग्नायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारआद्या काली नाम-मंत्र
स्वरूपआद्या काली
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
कारण-रूप (शराब या परब्रह्म) के महासागर में निमग्न रहने वाली।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
परब्रह्म रूपी महासागर में चेतना का विलीन होना
विस्तृत लाभ
परब्रह्म रूपी महासागर में चेतना का विलीन होना।
जप काल
नित्य उपासना, शिवरात्रि या अमावस्या की मध्यरात्रि में रुद्राक्ष या मुण्ड माला से जप।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ नारायणसमाश्रितायै नमः
धृत पाशाङ्कुश कल्पलता स्वरदश्च बीजपूरयुतः । शशिशकल कलितमौली त्रिलोचनोऽरुणश्च गजवदनः ॥ भासुरभूषण दीप्तो बृहदुदर पद्म विष्टरोल्लसितः । विघ्नपयोधरपवनः करधृत कमलः सदास्तु भूत्यै ॥
ॐ दैत्यकार्यविघातकाय नमः
ॐ नारायणाय नमः (पाञ्चरात्र दीक्षा)
ॐ पशुपालाय नमः
जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥ 17