शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ काली मंत्र
ॐ करञ्जमालाभरणायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारसहस्रनाम स्तोत्र मंत्र (दशमहाविद्या)
स्वरूपदशमहाविद्या काली / करालवदना काली
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
करंज के पुष्पों या बीजों की माला पहनने वाली।
जप काल
देवी की मूर्ति, यंत्र या चित्र के सम्मुख 'ककारादि सहस्रार्चन' विधि द्वारा।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
ह्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा ओष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: होठों और उच्चारण स्थान की रक्षा | अर्थ: विद्या की अधिष्ठात्री देवी मेरे होंठों की सदा रक्षा करें) 8
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये परमपुरुषः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
सूक्ष्मातिसूक्ष्मं कलिलस्य मध्ये विश्वस्य स्रष्टारमनेकरूपम्
कमले कमलाक्षवल्लभे त्वं करुणापूरतरङ्गितैरपाङ्गैः। अवलोकय मामकिञ्चनानां प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयायाः॥
ॐ भगवते नमः