वाल्मीकि रामायण - जय मंत्र (Jaya Mantra)
जयत्यतिबलो रामो लक्ष्मणश्च महाबलः। राजा जयति सुग्रीवो राघवेणाभिपालितः॥ दासोऽहं कोसलेन्द्रस्य रामस्याक्लिष्टकर्मणः। हनुमान् शत्रुसैन्यानां निहन्ता मारुतात्मजः॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इस मंत्र का अर्थ
अतिबलशाली राम, महाबली लक्ष्मण और राम द्वारा पालित राजा सुग्रीव की जय हो। मैं अक्लिष्ट कर्म (बिना किसी थकान के कार्य) करने वाले राम का दास हूँ। मैं पवनपुत्र हनुमान शत्रु सेनाओं का विनाशक हूँ।
इस मंत्र से क्या होगा?
युद्ध, भयंकर विपत्ति, कोर्ट-केस या किसी भी कठिन परिस्थिति में जहाँ विजय असंभव प्रतीत हो रही हो, यह मंत्र निश्चित विजय दिलाता है
विस्तृत लाभ
युद्ध, भयंकर विपत्ति, कोर्ट-केस या किसी भी कठिन परिस्थिति में जहाँ विजय असंभव प्रतीत हो रही हो, यह मंत्र निश्चित विजय दिलाता है 5।
जप काल
किसी भी महत्वपूर्ण कार्य से पूर्व 11 या 108 बार मानसिक उच्चारण।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र