शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ ज्ञानाश्रयाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
प्रकारविशिष्ट सहस्रनाम-मंत्र (Specific Sahasranama Mantras)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो समस्त आध्यात्मिक और लौकिक ज्ञान के अंतिम आश्रय (Refuge) हैं।
जप काल
रुद्राक्ष माला से मंगलवार का उपवास रखते हुए अभीष्ट सिद्धि हेतु।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
अघोरेभ्योऽथ घोरेभ्यो अघोरघोरेतरेभ्यः। सर्वतः शर्वः सर्वेभ्यो नमस्ते रुद्र रूपेभ्यः॥
ॐ सर्वदेवाधिदेवाय नमः
ॐ श्रीं ह्रीं भगवत्यै स्वाहा नेत्रयुग्मं सदाऽवतु। (स्वरूप: भगवती | लाभ: नेत्रों और सूक्ष्म दृष्टि की रक्षा | अर्थ: श्रीं ह्रीं स्वरूपा भगवती मेरे दोनों नेत्रों की रक्षा करें) 8
ॐ कामरूपिण्यै नमः
मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि। पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः॥
ॐ वेणुनादविशारदाय नमः