शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गुह्यकाली शतक्षरा मंत्र
ख्फ्रेँ ख्फ्रीँ चण्डे चण्डचामुण्डे ह्रीँ हूँ स्त्रीँ छ्रीँ विच्चे घोरे महामदोन्मनि क्लीँ ब्लूँ गुह्येश्वरि ॐ परानिर्वाणे ब्रह्मरूपिणि ॐ फ्रेँ फ्रेँ सिद्धिकरालि आप्यायिनि नवपञ्चचक्रनिलये घोराट्टराविणि कलासहस्रनिवासिनि खँ खँ खँ ह्सौँ फ्रेँ अवर्णेश्वरि प्रकृत्यपर शिवनिर्वाणदे ख्फ्रेँ स्वाहा॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारदुर्लभ गुह्य तांत्रिक मंत्र
स्वरूपगुह्यकाली (विंशतिवक्त्रा)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे चण्ड-मुण्ड विनाशिनी, गुह्येश्वरी, ब्रह्मरूपिणी, चक्रों की निवासिनी गुह्यकाली, मुझे निर्वाण और पूर्ण सिद्धियां प्रदान करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
कलाओं में निपुणता और परा-निर्वाण की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
कलाओं में निपुणता और परा-निर्वाण की प्राप्ति।
जप काल
केवल गुह्यकाली दीक्षा प्राप्त साधकों हेतु।
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