ध्यान एवं वंदना मंत्र
मनोजवम् मारुततुल्यवेगम् जितेन्द्रियम् बुद्धिमताम् वरिष्ठम्। वातात्मजम् वानरयूथमुख्यम् श्रीरामदूतम् शरणम् प्रपद्ये॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो मन के समान तीव्र गति वाले, वायु के समान वेग वाले, अपनी सभी इंद्रियों को जीतने वाले, बुद्धिमानों में सर्वश्रेष्ठ, वायु के पुत्र और वानर सेना के सेनापति हैं, उन श्रीरामदूत की मैं शरण लेता हूँ।
इस मंत्र से क्या होगा?
मानसिक शांति, चंचलता पर नियंत्रण, ज्ञान की प्राप्ति और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण
विस्तृत लाभ
मानसिक शांति, चंचलता पर नियंत्रण, ज्ञान की प्राप्ति और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण 24।
जप काल
किसी भी हनुमान साधना, रामायण पाठ या पूजा के आरंभ में हाथ जोड़कर ध्यान करते हुए।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ द्विषण्णेत्राय नमः
ॐ कृष्णलीलाशिरोमण्यै नमः
कांसोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम्। पद्मे स्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम्॥
नमस्ते शारदे देवि काश्मीरपुरवासिनि। त्वामहं प्रार्थये नित्यं विद्यादानं च देहि मे॥
ॐ भूवराहाय विद्महे हिरण्याक्षहराय धीमहि तन्नो वराहः प्रचोदयात्।
ॐ डिम्भाय नमः।