पूर्व मुख (वानर) रक्षण मंत्र
ॐ नमो भगवते पंचवदनाय पूर्व कपि मुखे। सकल शत्रु संहारणाय स्वाहा॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
पूर्व दिशा की ओर वानर (कपि) मुख वाले पंचमुखी भगवान को नमस्कार है, आप मेरे सभी शत्रुओं का संहार करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
सभी ज्ञात-अज्ञात शत्रुओं का विनाश, चित्त की शुद्धि और अभीष्ट की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
सभी ज्ञात-अज्ञात शत्रुओं का विनाश, चित्त की शुद्धि और अभीष्ट की प्राप्ति 10।
जप काल
पूर्व दिशा की ओर मुख करके पंचमुखी कवच पाठ के मध्य।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
सिन्दूराभमिभाननं त्रिनयनं च पाशाङ्कुशौ बिभ्राणं मधुमत्कपालमनिशं साद्विन्दुमौलिं भजे । पुष्ट्या श्लिष्टतनुं ध्वजाग्रकरया पद्मोल्लसद्धस्तया तद्योन्याहितपाणिमात्तवसुमत पात्रोल्लसत्पुष्करम् ॥
ॐ दुर्गायै नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये प्रकृतिः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ नरसिंहाय विद्महे वज्रनखाय धीमहि तन्नो नरसिंहः प्रचोदयात्।
ॐ कमलोद्भवायै नमः
ॐ योगीशफलदायिन्यै नमः