माँ काली मंत्र
रामोऽद्रिकूटेष्वथ विप्रवासे सानुजोऽव्याद् भरताग्रजो माम्
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
पर्वतों के शिखरों पर और विदेश में अपने अनुज (लक्ष्मण) के साथ भरत के अग्रज भगवान राम मेरी रक्षा करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
पर्वतों, पहाड़ियों और परदेस (विदेश) में निवास करते समय सुरक्षा
विस्तृत लाभ
पर्वतों, पहाड़ियों और परदेस (विदेश) में निवास करते समय सुरक्षा 61।
जप काल
विदेश यात्रा या पर्वतारोहण के समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ह्रीं विद्यास्वरूपायै स्वाहा मे पातु नाभिकाम्। (स्वरूप: विद्यास्वरूपा | लाभ: नाभि, मणिपूर चक्र और नाद के उद्गम स्थान 'पश्यन्ती' वाक् की रक्षा | अर्थ: विद्यास्वरूपा मेरी नाभि की रक्षा करें) 8
ॐ ज्वालाचक्राय स्वाहा – शिरसे स्वाहा
सिकताश्च मे वनस्पतयश्च मे हिरण्यं च मेऽयश्च मे...
उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह। प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन् कीर्तिमृद्धिं ददातु मे॥
ॐ देवी महागौर्यै नमः॥ 16
ॐ सर्वायुधविशारदाय नमः