शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ काली मंत्र
ॐ त्रिककुब्धाम्ने नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
तीनों दिशाओं (ऊर्ध्व, मध्य, अधः) के आश्रय
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
दसों दिशाओं में रक्षा
विस्तृत लाभ
दसों दिशाओं में रक्षा 81
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अष्टमूर्तये नमः।
ॐ बाणासुरकरान्तकाय नमः
अहमेव स्वयमिदं वदामि जुष्टं देवेभिरुत मानुषेभिः। यं कामये तं तमुग्रं कृणोमि तं ब्रह्माणं तमृषिं तं सुमेधाम्॥
ॐ ऋषिप्रवरवन्द्याय नमः
ॐ राघवाय नमः
ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भूत, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।