शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ काली मंत्र
ॐ शुचये नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपपरम पवित्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
परम शुद्ध, सात्विक और पवित्रता के प्रतीक भगवान को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
हरिद्रां चतुर्बाहुं हरिद्रावदनं प्रभुम् । पाशाङ्कुशधरं देवं मोदकं दन्तमेव च ॥ भक्ताभयप्रदातारं वन्दे विघ्नविनाशनम् ॥
ॐ भ्राजिष्णवे नमः
कर्णयुग्मं च कण्ठं च कपालं पातु माधवः । कपोलं पातु गोविन्दः केशांश्च केशवः स्वयम् ॥
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं आद्या कालिके परमेस्वरि स्वाहा॥
ॐ जटाधराय नमः
ॐ महापातकनाशिन्यै नमः