परशुराम अष्टकम् (श्लोक 4)
वशीकृतमहादेवं दृप्तभूपकुलान्तकम्। तेजस्विनं कार्तवीर्यनाशनं भवनाशनम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जिन्होंने अपनी अनन्य भक्ति से साक्षात् महादेव को वश में कर लिया, जो अंहकारी राजाओं के कुल का अंत करने वाले हैं, उन अत्यंत तेजस्वी, कार्तवीर्य अर्जुन के नाशक और जन्म-मरण के चक्र (भव) को नष्ट करने वाले परशुराम को नमन।
इस मंत्र से क्या होगा?
अत्यंत अंहकारी और शक्तिशाली शत्रुओं का नाश और भगवान शिव की कृपा की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
अत्यंत अंहकारी और शक्तिशाली शत्रुओं का नाश और भगवान शिव की कृपा की प्राप्ति।
जप काल
घोर शत्रु-बाधा निवारण हेतु।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ बलवते नमः
ॐ वाचं वाणी सदा पातु।
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्माकं दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ।
ॐ पञ्चवक्त्राय नमः
ॐ दुर्लभाय नमः
रक्तो रक्ताङ्गरागां शुक कुसुमायुत तुन्दिलश्चन्द्रमौलिः नेत्रैर्युक्तस्त्रिभिर्वामनकरचरणो बीजपूरं दधानः । हस्ताग्रक्लृप्त पाशाङ्कुश शरवरदो नागवक्त्रो हि भूषो देवः पद्मासनस्थो भवतु सुखकरो भूतये विघ्नराजः ॥