शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ अग्निजन्मने नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपअग्नि-संभव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
अग्नि से उत्पन्न होने वाले देव को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
जठराग्नि व शारीरिक तेज की प्रखरता
विस्तृत लाभ
जठराग्नि व शारीरिक तेज की प्रखरता।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
क्षरं प्रधानममृताक्षरं हरः क्षरात्मानावीशते देव एकः। तस्याभिध्यानाद्योजनात्तत्त्वभावाद् भूयश्चान्ते विश्वमायानिवृत्तिः॥
य इदं कवचं श्रीदं पठेद्विष्णुप्रियात्मकम्। त्रैलोक्यं विजितं तेन येन वा धारितं भवेत्॥
ॐ त्रिलोकरक्षकाय नमः
सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि। गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते॥ 18
ॐ अज्ञाननाशिन्यभीष्टदायै नमः
ॐ कदलीवनसुन्दर्यै नमः