शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ सुरारिघ्ने नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपदैत्य-हंता
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
देवों के शत्रुओं का वध करने वाले को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अदृश्य शत्रुओं और दुर्भावनाओं से रक्षा
विस्तृत लाभ
अदृश्य शत्रुओं और दुर्भावनाओं से रक्षा।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
वृत्तोत्फुल्लविशालाक्षं विपक्षक्षयदीक्षितम्। निनादत्रस्तविश्वाण्डं विष्णुमुग्रं नमाम्यहम्॥
जलेषु मां रक्षतु मत्स्यमूर्तिर् यादोगणेभ्यो वरुणस्य पाशात्
यामिषुं गिरिशन्त हस्ते बिभर्ष्यस्तवे। शिवां गिरित्र तां कुरु मा हिंसीः पुरुषं जगत्॥
ॐ श्रीकृष्णरमण्यै राधायै नमः
श्रीं वाग्देवतायै स्वाहा भालं मे सर्वदाऽवतु। (स्वरूप: वाग्देवता | लाभ: मस्तक, आज्ञा चक्र व विचार-केंद्र की रक्षा | अर्थ: श्रीं बीज रूपी वाग्देवता मेरे ललाट की सदा रक्षा करें) 8
ॐ हुं गं ग्लौं ॥