शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ शिखण्डिकृतकेतनाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपशिखंडी-ध्वज
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
मयूर (शिखंडी) को अपनी ध्वजा (केतन) बनाने वाले को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
कीर्ति-पताका (यश) का सर्वत्र फहराना
विस्तृत लाभ
कीर्ति-पताका (यश) का सर्वत्र फहराना।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ विष्णवे नमः
यँ यँ हनुमते फल फक्रिया हौत धग् धग् आयुरस्व प ख हेति फट्॥
ॐ महाघोराय नमः।
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये विष्ण्विन्द्रादिदेवात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
नमो हिरण्यबाहवे सेनान्ये दिशां च पतये नमः।
त्वं वैष्णवी शक्तिरनन्तवीर्या विश्वस्य बीजं परमासि माया। सम्मोहितं देवि समस्तमेतत् त्वं वै प्रसन्ना भुवि मुक्तिहेतुः॥ 36