शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ वर्णाश्रयप्रदाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपवर्ण-रक्षक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सभी वर्णों और आश्रमों को आश्रय देने वाले देव को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
समाज के सभी वर्गों के साथ समरसता
विस्तृत लाभ
समाज के सभी वर्गों के साथ समरसता।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ क्षेत्रज्ञाय नमः।
ॐ श्रीनिवासाय नमः
ॐ सत्यसन्धाय नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये अन्तश्चेतनात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
सर्वं जगदिदं त्वत्तो जायते ॥ सर्वं जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति ॥ सर्वं जगदिदं त्वयि लयमेष्यति ॥ सर्वं जगदिदं त्वयि प्रत्येति ॥ त्वं भूमिरापोऽनलोऽनिलो नभः ॥ त्वं चत्वारि वाक्पदानि ॥
देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य। प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥ 18