शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ फालनेत्रसुताय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपशिवपुत्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
भाल (मस्तक) पर नेत्र धारण करने वाले शिव के पुत्र को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
तृतीय नेत्र (आज्ञा चक्र) का जागरण
विस्तृत लाभ
तृतीय नेत्र (आज्ञा चक्र) का जागरण।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वागधिष्ठातृदेव्यै सर्वाङ्गं मे सदाऽवतु। (स्वरूप: वागधिष्ठात्री | लाभ: संपूर्ण शरीर की आध्यात्मिक और भौतिक रक्षा | अर्थ: वाक् की अधिष्ठात्री देवी मेरे संपूर्ण अंगों की रक्षा करें) 8
ॐ ह्रीं बटुकाय मम कन्या विवाह बाधा निवारणं कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।
ॐ पुरुषाय नमः
ॐ पिङ्गाक्षाय नमः
ॐ प्राज्ञाय नमः
वियदीकारसंयुक्तं वीतिहोत्रसमन्वितम्। अर्धेन्दुलसितं देव्या बीजं सर्वार्थसाधकम्॥