शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ वामनप्रियाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपविष्णु-अवतारी प्रिय
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
भगवान वामन (विष्णु) को प्रिय देव को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अहंकार का दमन और विनम्रता का विकास
विस्तृत लाभ
अहंकार का दमन और विनम्रता का विकास।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये भूतभविष्यत् तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ वृन्दावनविहारिण्यै नमः
ॐ परशुहस्ताय नमः
ॐ स्मृतये नमः
ॐ प्रजापतये नमः
ॐ श्रीं ह्रीं पातु मे ग्रीवां स्कन्धं मे श्रीं सदाऽवतु। (स्वरूप: श्रीं ह्रीं स्वरूपा | लाभ: गर्दन और कंधों की रक्षा | अर्थ: देवी मेरी ग्रीवा और स्कंध की रक्षा करें) 8