शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ नानावेषाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपबहुरूपी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
अनेक रूप और वेष धारण करने वाले को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने की कला (Adaptability)
विस्तृत लाभ
परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने की कला (Adaptability)।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस मे गृहे। नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले॥
ॐ दिगम्बराय नमः।
ॐ वार्धौमैनाकपूजिताय नमः
ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः
ॐ मेधा देवी जुषमाणा न आगाद्विश्वाची भद्रा सुमनस्यमाना। त्वया जुष्टा नुदमाना दुरुक्तान बृहद्वदेम विदथे सुवीराः॥
अहमेव वात इव प्र वाम्यारभमाणा भुवनानि विश्वा। परो दिवा पर एना पृथिव्यैतावती महिना सम्बभूव॥