शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ उदारकीर्तये नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपयशस्वी रूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनकी कीर्ति (यश) अत्यंत उदार, व्यापक और ब्रह्मांड में फैली है, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
समाज में बेदाग यश, कीर्ति और उच्च कोटि के सम्मान की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
समाज में बेदाग यश, कीर्ति और उच्च कोटि के सम्मान की प्राप्ति।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ त्रिलोचनाय नमः।
ॐ गद्यपद्यवासिन्यै स्वाहा मामुत्तरेऽवतु। (अर्थ: गद्य-पद्य में निवास करने वाली देवी उत्तर में रक्षा करें) 8
ॐ ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः।
ॐ अखिलाद्याय नमः
ॐ ब्रह्मणस्पते त्वमस्य यन्ता सूक्तस्य बोधि तनयं च जिन्व । विश्वं तद्भद्रं यदवन्ति देवा बृहद्वदेम विदथे सुवीराः ॥
ॐ गौतम बुद्धाय नमः