शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नीलांजना सरस्वती मन्त्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं नीलांजना समाभास्वरूपिणी। या स्वाहा
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारतांत्रिक ध्यान मन्त्र
स्वरूपनीलांजना (नीले वर्ण वाली ज्ञान देवी)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
नीले अंजन के समान आभा वाली, प्रज्ञा और ऐश्वर्य स्वरूपा देवी सरस्वती को आहुति (समर्पण)।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
रचनात्मकता (Creativity), गहरी एकाग्रता और कलात्मकता का विकास
विस्तृत लाभ
रचनात्मकता (Creativity), गहरी एकाग्रता और कलात्मकता का विकास।
जप काल
कला या संगीत-साधना आरंभ करने से पूर्व।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कारणानन्दसिद्धिदायै नमः
ॐ नीलवस्त्रधराय नमः
ॐ शिखण्डिकृतकेतनाय नमः
क्ष्म्रीं (Kṣmrīm)
योगारूढो योगपट्टाभिरामः बालार्कभाश्च नीलांगशुकः । पाशेक्ष्वाक्षान् योगदण्डं दधानः पायान्नित्यं योगविघ्नेश्वरः नः ॥
नैऋत्ये क्रोध भैरवाय नमः नैऋत्ये मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।