शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
षण्मुख कवचम्
अण्डमाय अवनी आहि अरीयोणप् पोरुळ ताहि
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारश्लोक 1
स्वरूपआदि कैलासनाथ
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो ब्रह्मांड और पृथ्वी रूप में व्याप्त हैं, वे कैलास के पुत्र मेरे माथे की रक्षा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
मानसिक और शारीरिक रोगों से रक्षा
विस्तृत लाभ
मानसिक और शारीरिक रोगों से रक्षा।
जप काल
रोग या शत्रु भय के समय।
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