शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
स्कंद स्तुति
ॐ नमः प्रणवार्थाय प्रणवार्थविधायिने । प्रणवाक्षरबीजाय प्रणवाय नमो नमः ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारश्लोक 1
स्वरूपॐकार स्वरूप (स्वामिनाथ)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
प्रणव (ॐ) के अर्थ स्वरूप, प्रणव के विधानकर्ता और स्वयं प्रणव स्वरूप भगवान को नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
परब्रह्म के रहस्य का ज्ञान
विस्तृत लाभ
परब्रह्म के रहस्य का ज्ञान।
जप काल
गुरु दीक्षा या वेदाध्ययन से पूर्व।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा ॥
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्माकं दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ।
शुद्धं बुद्धं महाप्रज्ञापण्डितं रणपण्डितं। रामं श्रीदत्तकरुणाभाजनं विप्ररंजनम्॥
ॐ श्रीमते नमः
ॐ ज्यां ह्रीं जय जय जगन्मातः ऐं वद वद वाग्वादिनि स्वाहा
ॐ करुणार्णवसम्पूर्णायै नमः