शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ अशोकवनिकाच्छेत्रे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपवन-विध्वंसक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
रावण की अशोक वाटिका को नष्ट-भ्रष्ट करने वाले को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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