शृतं मे मा प्रहासीः
ॐ शृतं मे मा प्रहासीः अनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधामि ऋतं वदिष्यामि सत्यं वदिष्यामि। तन्मामवतु तद्वक्तारमवतु अवतु मामवतु वक्तारमवतु वक्तारम्। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
मैंने जो सुना (पढ़ा) है, वह मेरा त्याग न करे (मुझे याद रहे)। इस अध्ययन से मैं दिन-रात को एक कर दूँ। मैं ऋत (शाश्वत सत्य) बोलूंगा, सत्य बोलूंगा। वह ब्रह्म मेरी रक्षा करे, वह वक्ता (गुरु) की रक्षा करे।
इस मंत्र से क्या होगा?
अध्ययन किए गए ज्ञान का विस्मरण न होना (याददाश्त पक्की होना), सत्यभाषण की अमोघ शक्ति
विस्तृत लाभ
अध्ययन किए गए ज्ञान का विस्मरण न होना (याददाश्त पक्की होना), सत्यभाषण की अमोघ शक्ति।
जप काल
वेदाध्ययन या किसी भी गंभीर पुस्तक के पठन से पूर्व।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्। लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्॥
ॐ सीतारामपादुकासेवायै नमः
ॐ वासिष्ठादिमुनिश्रेष्ठवन्दिताय नमः
ॐ प्रभवे नमः।
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ।
जो अत्यंत तेजस्वी और महाप्रतापी हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: व्यक्तित्व में तेज और ओज की वृद्धि) 19।