ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

कृपां कुरु जगन्मातर् (याज्ञवल्क्य कृत)

कृपां कुरु जगन्मातर्मामेवं हततेजसम्। गुरुशापात्स्मृतिभ्रष्टं विद्याहीनं च दुःखितम्॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारशाप-विमोचन स्तोत्र मन्त्र
स्वरूपजगन्माता
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

हे जगन्माता! मुझ तेजहीन, स्मृतिभ्रष्ट, विद्याहीन और दुःखी पर कृपा करें।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

गुरु के शाप, ग्रहों के दोष या दुर्भाग्य से खोई हुई स्मृति या ज्ञान को पुनः प्राप्त करना

विस्तृत लाभ

गुरु के शाप, ग्रहों के दोष या दुर्भाग्य से खोई हुई स्मृति या ज्ञान को पुनः प्राप्त करना।

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