शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ अव्यग्राय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र (Nama-Mantras)।
स्वरूपशांत / अव्यग्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो अत्यंत स्थिर हैं, कभी व्याकुल नहीं होते 70।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अत्यंत विपरीत परिस्थिति में भी स्थिरता
विस्तृत लाभ
अत्यंत विपरीत परिस्थिति में भी स्थिरता
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
ॐ ह्रीं विद्यास्वरूपायै स्वाहा मे पातु नाभिकाम्। (स्वरूप: विद्यास्वरूपा | लाभ: नाभि, मणिपूर चक्र और नाद के उद्गम स्थान 'पश्यन्ती' वाक् की रक्षा | अर्थ: विद्यास्वरूपा मेरी नाभि की रक्षा करें) 8
ॐ लोकमात्रे नमः
ॐ नागहाराय नमः।
तमर्वन्तं न सानसिमरुषं न दिवः शिशुम् । मर्मृज्यन्ते दिवेदिवे ॥
ॐ महावीराय नमः