शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ भिन्नलोहाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारयुगल-नाम मन्त्र; ये मन्त्र गोलोक धाम के अधिष्ठाता श्री राधा-कृष्ण के संयुक्त लीला-माधुर्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपबन्धन-भंजक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
पिता वसुदेव की लोहे की बेड़ियाँ तोड़ने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
कर्म-बन्धनों से मुक्ति
विस्तृत लाभ
कर्म-बन्धनों से मुक्ति
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कोमलाङ्ग्यै नमः
ॐ खड्गपाणये नमः।
आवत हियँ हरषीं नहिं नैनन्हि नहिं सनेह। तुलसी तहाँ न जाइये कंचन बरसे मेह॥
ॐ अग्नाविष्णू सजोषसेमा वर्धन्तु वां गिरः। द्युम्नैर्वाजेभिरागतम्॥
ॐ ज्वालाचक्राय स्वाहा – शिरसे स्वाहा
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥ या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥