गोपीजनवल्लभाय स्वाहा
गोपीजनवल्लभाय स्वाहा
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
गोपीजनों के प्राणवल्लभ (भगवान श्रीकृष्ण) को मैं अपनी आहुति (समर्पण) देता हूँ 1।
इस मंत्र से क्या होगा?
बृहद्-गौतमीय तन्त्र के अनुसार यह मन्त्र सांसारिक सुख-समृद्धि, इन्द्र-पद के समान ऐश्वर्य और अन्ततः मोक्ष दोनों प्रदान करने में सक्षम है
विस्तृत लाभ
बृहद्-गौतमीय तन्त्र के अनुसार यह मन्त्र सांसारिक सुख-समृद्धि, इन्द्र-पद के समान ऐश्वर्य और अन्ततः मोक्ष दोनों प्रदान करने में सक्षम है 1।
जप काल
गुरु-निर्देशानुसार सकाम या निष्काम भाव से पुरश्चरण विधि द्वारा।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ हृषीकेशाय नमः
ॐ विष्णुप्रियाय नमः
ॐ दुर्गनिहन्त्र्यै नमः
महेन्द्रे वै गिरिश्रेष्ठे रामं नित्यम् उपासते। ऋषयो वेदविदुषो गन्धर्वाप्सरसस्तथा॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये चराचरात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ॥