शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ चतुर्भुजात्तचक्रासिगदाशङ्खाद्यायुधाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपचतुर्भुज नारायण
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
चार भुजाओं में शंख, चक्र, गदा और असि (खड्ग) धारण करने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
भय नाश (कवच रूप)
विस्तृत लाभ
भय नाश (कवच रूप)
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ॐ विश्वस्मै नमः
सीसं च मे त्रपु च मे श्यामं च मे लोहं च मे...
ॐ वासुदेवाय वन्द्याय नमः
या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः। श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्वम्॥ 18
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये विशुद्धात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ वल्लीवदनपद्मार्कय नमः