ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

षण्मुख कवचम्

इरचेवि हलयुम सेव्वाळ इयलपुडन काक्क वायकै

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारश्लोक 2
स्वरूपषण्मुख
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

भगवान अपने वेल् (भाले) से मेरे दोनों कानों और मुख की स्वभाविक रूप से रक्षा करें।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

मुख और कानों से संबंधित व्याधियों का शमन

विस्तृत लाभ

मुख और कानों से संबंधित व्याधियों का शमन।

जप काल

कवच के अंग-न्यास रूप में।

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