शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ जनार्दनाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपजनार्दन
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सभी जीवों का पोषण करने वाले को नमन।
जप काल
भोजन (Eating) करते समय
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
यं यं कामयते कामं तं तं प्राप्नोति साधकः। राधाकृपाकटाक्षेण भक्तिः स्यात् प्रेमलक्षणा॥
ॐ श्रियै नमः
ॐ नं रूं अनादिशक्तिधाम्ने अघोरात्मने मध्यमाभ्यां नमः
ॐ भव्याय नमः
ॐ ह्रीं बटुकाय मम अकाल मृत्यु निवारय निवारय बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये त्रिलोकात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः