शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ जितक्रोधाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपक्रोध-विजेता
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिन्होंने अपने उग्र क्रोध पर पूर्ण विजय प्राप्त कर ली है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
क्रोध शमन
विस्तृत लाभ
क्रोध शमन
जप काल
क्रोध आने पर
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा । भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः ॥ स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिः । व्यशेम देवहितं यदायुः ॥
ॐ स्वाहायै नमः
ॐ शतकोटिरविप्रभाय नमः
ॐ ज्वालाचक्राय स्वाहा – शिरसे स्वाहा
श्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा वक्षः सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: हृदय व वक्ष-स्थल की रक्षा | अर्थ: विद्या देवी मेरे वक्ष की रक्षा करें) 8
ॐ सत्यभामायै नमः