शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ जितक्रोधाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपक्रोध-विजेता
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिन्होंने अपने उग्र क्रोध पर पूर्ण विजय प्राप्त कर ली है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
क्रोध शमन
विस्तृत लाभ
क्रोध शमन
जप काल
क्रोध आने पर
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ नमो नारसिंहाय
ॐ विष्णवे नमः
हरिद्रां चतुर्बाहुं हरिद्रावदनं प्रभुम् । पाशाङ्कुशधरं देवं मोदकं दन्तमेव च ॥ भक्ताभयप्रदातारं वन्दे विघ्नविनाशनम् ॥
मखेश्वरि क्रियेश्वरि स्वधेश्वरि सुरेश्वरि त्रिवेदभारतीश्वरि प्रमाणशासनेश्वरि। रमेश्वरि क्षमेश्वरि प्रमोदकाननेश्वरि व्रजेश्वरि व्रजाधिपे श्रीराधिके नमोऽस्तु ते॥
ॐ क्रौञ्चदारणाय नमः
ह्रीं भैरव भयंकरहर मां रक्ष-रक्ष हुं फट् स्वाहा।