शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ त्रिवर्णाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपत्रिदेव स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
त्रिदेव (ब्रह्मा-विष्णु-महेश) स्वरूप को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सृष्टि, स्थिति और लय के रहस्यों का ज्ञान
विस्तृत लाभ
सृष्टि, स्थिति और लय के रहस्यों का ज्ञान।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सुभाषिण्यै नमः
ॐ उत्तालतालभेत्त्रे नमः
ॐ सेतुकृते नमः
अहमेव स्वयमिदं वदामि जुष्टं देवेभिरुत मानुषेभिः। यं कामये तं तमुग्रं कृणोमि तं ब्रह्माणं तमृषिं तं सुमेधाम्॥
ॐ श्रीमते नमः
पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।