शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ पिशिताशप्रभञ्जनाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपरक्षक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
राक्षसों (मांस-भक्षियों) का विनाश करने वाले देव को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
नकारात्मक ऊर्जा और तंत्र-बाधा का शमन
विस्तृत लाभ
नकारात्मक ऊर्जा और तंत्र-बाधा का शमन।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ भैरव्यै नमः
ॐ मूलाधारनिवासिने नमः
ॐ उपेन्द्राय नमः
ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भूत, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।
ॐ रुद्राय नमः
ॐ मारणाय नमः।