शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ विरुद्धहन्त्रे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपधर्म-संस्थापक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
धर्म के विरुद्ध आचरण करने वालों का नाश करने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
न्याय की प्राप्ति और अधर्म का नाश
विस्तृत लाभ
न्याय की प्राप्ति और अधर्म का नाश।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
सर्वं जगदिदं त्वत्तो जायते ॥ सर्वं जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति ॥ सर्वं जगदिदं त्वयि लयमेष्यति ॥ सर्वं जगदिदं त्वयि प्रत्येति ॥ त्वं भूमिरापोऽनलोऽनिलो नभः ॥ त्वं चत्वारि वाक्पदानि ॥
ॐ भुवनेश्वर्यै नमः
तमीश्वराणां परमं महेश्वरं तं देवतानां परमं च दैवतम्
ॐ विष्णुवक्षःस्थलस्थितायै नमः
तब जनक पाइ बसिष्ठ आयसु ब्याह साजि सँवारि कै। मांडवी श्रुतकीरति उरमिला कुँअरि लईं हँकारि कै॥
ॐ करमालाप्रतोषितायै नमः