श्री राधा मंत्र
अनन्तकोटिविष्णुलोकनम्रपद्मजार्चिते हिमाद्रिजापुलोमजाविरिञ्चिजावरप्रदे। अपारसिद्धिरिद्धिदिग्दिगन्तकीर्तिदिगधमे कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
अनन्त कोटि विष्णुलोकों द्वारा पूजित और पार्वती, शची व सरस्वती को वर देने वाली हे कीर्तिमयी राधे, कृपा करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
लाभ: अष्ट-सिद्धि और कीर्ति की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
लाभ: अष्ट-सिद्धि और कीर्ति की प्राप्ति।
टिप्पणी
यहाँ इस सिद्ध स्तोत्र के सभी 19 श्लोकों को मंत्र रूप में, उनके अर्थ और लाभ सहित प्रस्तुत किया गया है। सभी का
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ महात्मने नमः
ॐ सर्वे वै देवा देवीमुपतस्थुः कासि त्वं महादेवीति। साब्रवीत्- अहं ब्रह्मस्वरूपिणी। मत्तः प्रकृतिपुरुषात्मकं जगत्। शून्यं चाशून्यं च॥
श्रीमन् नारायण चरणौ शरणं प्रपद्ये। श्रीमते नारायणाय नमः॥
ॐ शुकवागमृताब्धीन्दवे नमः
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
ॐ सुन्दराय नमः