श्री राधा मंत्र
तेन स तत्क्षणादेव तुष्टा दत्ते महावरम्। येन पश्यति नेत्राभ्यां तत्प्रियं श्यामसुन्दरम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
इस पाठ से संतुष्ट होकर श्री राधा तुरंत ऐसा महावरदान देती हैं, जिससे साधक अपने नेत्रों से उनके प्रियतम श्यामसुन्दर के दर्शन करता है।
इस मंत्र से क्या होगा?
लाभ: श्यामसुन्दर (कृष्ण) के दर्शन
विस्तृत लाभ
लाभ: श्यामसुन्दर (कृष्ण) के दर्शन।
टिप्पणी
यहाँ इस सिद्ध स्तोत्र के सभी 19 श्लोकों को मंत्र रूप में, उनके अर्थ और लाभ सहित प्रस्तुत किया गया है। सभी का
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ दीप्तायै नमः
बालार्कारुणकान्तिर्वामे बालां वहन् अङ्के । लसदिन्दीवर हस्तं गौराङ्गीं रत्नशोभाढ्याम् ॥ दक्षे अङ्कुश वरदानं वामे पाशं च पायसं पात्रम् । नीलांशुक समान पीठपद्मारुणे तिष्ठन् संकटहरणः पायात् ॥
बालग्रहाभिभूतानां बालानां शान्तिकारकम्। सङ्घातभेदे च नृणां मैत्रीकरणमुत्तमम्॥ 17
ॐ क्लीं ऐं नमो भगवते रघुनन्दनाय रक्षोघ्न विषधाय मधुरप्रसन्न-वदनाय अमिततेजसे बलाय रामाय विष्णवे नमः क्लीं ऐं ॐ
ॐ कमलामखलोलाक्षाय नमः
ॐ अदीनाय नमः