शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ तीर्थपादाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपतीर्थ-पाद
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनके चरणों से तीर्थों (जैसे गंगा) की उत्पत्ति हुई है, उन्हें नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
घर को तीर्थ बनाने हेतु
विस्तृत लाभ
घर को तीर्थ बनाने हेतु
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कृपाध्यक्षायै नमः
अस्य घा वीर ईवतोऽग्नेरीशीत मर्त्यः । तिग्मजम्भस्य मीळ्हुषः ॥
ह्रीं श्रीं हंसः ह्लसौं स्वाहा।
ॐ ह्रीं विद्यास्वरूपायै स्वाहा मे पातु नाभिकाम्। (स्वरूप: विद्यास्वरूपा | लाभ: नाभि, मणिपूर चक्र और नाद के उद्गम स्थान 'पश्यन्ती' वाक् की रक्षा | अर्थ: विद्यास्वरूपा मेरी नाभि की रक्षा करें) 8
नारायणाद् ब्रह्मा जायते। नारायणाद् रुद्रो जायते।
ॐ अनन्तनित्यायै नमः