शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ कालीयफणिमाणिक्यरञ्जितश्रीपदाम्बुजाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपकालिया-मर्दन
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
कालीय नाग के फनों की मणियों से जिनके चरण रंजित हुए, उन्हें नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
विष और सर्प-भय नाश
विस्तृत लाभ
विष और सर्प-भय नाश
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ह्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा ओष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: होठों और उच्चारण स्थान की रक्षा | अर्थ: विद्या की अधिष्ठात्री देवी मेरे होंठों की सदा रक्षा करें) 8
ॐ भुक्तिमुक्तिप्रदायै नमः
ॐ कदम्बपुष्पसन्तोषायै नमः
ॐ प्रह्लादपालकाय नमः
ॐ दक्षाय नमः
ॐ नमो भगवते पंचवदनाय दक्षिण मुखे। कराल वदनाय नरसिंहाय सकल भूत प्रेत प्रमथनाय स्वाहा॥