शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
ओष्ठ रक्षा मन्त्र
ह्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा ओष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: होठों और उच्चारण स्थान की रक्षा | अर्थ: विद्या की अधिष्ठात्री देवी मेरे होंठों की सदा रक्षा करें) 8
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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