शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
ओष्ठ रक्षा मन्त्र
ह्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा ओष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: होठों और उच्चारण स्थान की रक्षा | अर्थ: विद्या की अधिष्ठात्री देवी मेरे होंठों की सदा रक्षा करें) 8
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ विश्वेशाय नमः
ॐ तपोरूपाय विद्महे ब्रह्मचारिणे धीमहि तन्नो वामनः प्रचोदयात्।
ॐ पुण्यगन्धायै नमः
गाङ्गेयस्ताम्रचूडश्च ब्रह्मचारी शिखिध्वजः । तारकारिरुमापुत्रः क्रौञ्चारिश्च षडाननः ॥
ॐ सच्चिदानन्दविग्रहाय नमः
ऐं ह्रीं श्रीं क्रौं हौं ह्रूं क्षूं त्रिकालाग्नि भैरवाय क्षूं ह्रूं हौं क्रौं श्रीं ह्रीं ऐं नमः।