शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
वामन गायत्री मंत्र
ॐ तपोरूपाय विद्महे ब्रह्मचारिणे धीमहि तन्नो वामनः प्रचोदयात्।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपवामन अवतार
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अहंकार का शमन और गुरु-कृपा की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
अहंकार का शमन और गुरु-कृपा की प्राप्ति 68।
जप काल
दान या तपस्या के समय।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्॥
कल्हार शालि कमलेक्षुक चाप बाण दन्तप्ररोहक गदी कनकोज्ज्वलाङ्गः । आलिङ्गनोद्यतकरो हरिताङ्गयष्ट्या देव्या दिशत्वभयम् ऊर्ध्वगणाधिपो मे ॥
ॐ त्रिलोकात्मने नमः
अग्रतश्चतुरो वेदान् पृष्ठतः सशरं धनुः। उभाभ्यां च समर्थोऽहं शापादपि शरादपि॥
ॐ कस्तूरीतिलकोज्ज्वलायै नमः
ॐ भूपतये नमः