ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

माँ सरस्वती मंत्र

विद्या की देवी

210 मंत्र

मंत्र

ॐ सेव्यायै नमः

मंत्र

ॐ सन्ध्यायै नमः

मंत्र

ॐ सर्वार्तिघ्न्यै नमः

मंत्र

ॐ सर्वेश्वर्यै नमः

मंत्र

ॐ सर्वपुण्यायै नमः

मंत्र

ॐ सर्वदेवनिषेवितायै नमः

मंत्र

ॐ सर्वैश्वर्यप्रदायै नमः

मंत्र

ॐ सत्त्वगुणाश्रयायै नमः

मंत्र

ॐ सर्वदोषनिषूदिन्यै नमः

मंत्र

ॐ सहस्राक्ष्यै नमः

मंत्र

ॐ सहस्रास्यायै नमः

मंत्र

ॐ सहस्रहस्तायै नमः

मंत्र

ॐ स्वधायै नमः

मंत्र

ॐ स्वाहायै नमः

मंत्र

ॐ सावित्र्यै नमः

मंत्र

ॐ स्तुत्यायै नमः

मंत्र

ॐ महामात्रे नमः

मंत्र

ॐ महेश्वायै नमः

मंत्र

ॐ मूर्त्यै नमः

मंत्र

ॐ मणिभूषणायै नमः

मंत्र

ॐ मानिन्यै नमः

मंत्र

ॐ मान्यायै नमः

मंत्र

ॐ मृत्युघ्न्यै नमः

मंत्र

ॐ मेरुरूपिण्यै नमः

मंत्र

ॐ मदिराक्ष्यै नमः

मंत्र

ॐ मखरूपायै नमः

मंत्र

ॐ महामोहायै नमः

मंत्र

ॐ विश्वतोवदनायै नमः

मंत्र

ॐ वाण्यै नमः

मंत्र

ॐ वरप्रदायै नमः

मंत्र

ॐ विषघ्न्यै नमः

मंत्र

ॐ वृष्ट्यै नमः

मंत्र

ॐ विश्वमात्रे नमः

मंत्र

ॐ विनायकायै नमः

मंत्र

ॐ विश्वशक्त्यै नमः

मंत्र

ॐ वेद्यायै नमः

मंत्र

ॐ वित्तायै नमः

मंत्र

ॐ वेदजनन्यै नमः

मंत्र

ॐ वरेण्यायै नमः

मंत्र

ॐ वाङ्मय्यै नमः

मंत्र

ॐ महामायायै नमः

मंत्र

ॐ व्यापिन्यै नमः

मंत्र

ॐ व्यालघ्न्यै नमः

मंत्र

ॐ विरजायै नमः

मंत्र

ॐ वेदान्तज्ञानरूपिण्यै नमः

मंत्र

ॐ विभावर्यै नमः

मंत्र

ॐ विक्रान्तायै नमः

मंत्र

ॐ विश्वामित्रायै नमः

मंत्र

ॐ वरिष्ठायै नमः

मंत्र

ॐ वेदमूर्त्यै नमः

मंत्र

ॐ गुणवत्यै नमः

मंत्र

ॐ गुहान्तस्थायै नमः

मंत्र

ॐ सर्वसिद्धायै नमः

मंत्र

ॐ त्रयीमूर्त्यै नमः

मंत्र

ॐ ह्रीं ऐं महासरस्वति महासारस्वतप्रदे ऐं वद वद वाग्वादिनि स्वाहा

मंत्र

ॐ ऐं क्लीं सौः बाले ब्राह्मि ब्रह्मपत्नि ऐं वद वद वाग्वादिनि स्वाहा

मंत्र

ॐ ज्यां ह्रीं जय जय जगन्मातः ऐं वद वद वाग्वादिनि स्वाहा

मंत्र

ऐं क्लीं सौः कल्याणि कामधारिणि वद वद वाग्वादिनि स्वाहा

मंत्र

ॐ महाभद्रायै नमः

मंत्र

ॐ पद्मनिलयायै नमः

मंत्र

ॐ पुस्तकधृते नमः

मंत्र

ॐ ज्ञानमुद्रायै नमः

मंत्र

ॐ महापातकनाशिन्यै नमः

मंत्र

ॐ विद्युन्मालायै नमः

मंत्र

ॐ चन्द्रलेखाविभूषितायै नमः

मंत्र

ॐ ब्रह्मज्ञानैकसाधनायै नमः

मंत्र

ॐ ऐं नमः शारदे श्रीं शुद्धे नमः शारदे ऐं वद वद वाग्वादिनि स्वाहा

मंत्र

ॐ शास्त्ररूपिण्यै नमः

मंत्र

ॐ वाचें नमः

मंत्र

ॐ विश्ववन्द्यायै नमः

मंत्र

ॐ वेदान्तवेदिन्यै नमः

मंत्र

ॐ व्यापकात्मिकायै नमः

मंत्र

ॐ गन्धर्वनगरप्रियायै नमः

मंत्र

ॐ सर्वसिद्धिप्रदायिन्यै नमः

मंत्र

ॐ स्वरक्रमपदाकारायै नमः

मंत्र

ॐ सहस्रशीर्षायै नमः

मंत्र

ॐ षड्ग्रन्थिभेदिन्यै नमः

मंत्र

ॐ मणिपूरैकनिलयायै नमः

मंत्र

ॐ मोहमन्त्रिण्यै नमः

मंत्र

ॐ योगहृत्पद्मनिलयायै नमः

मंत्र

ॐ महापुण्यायै नमः

मंत्र

ॐ महासम्पत्प्रदायिन्यै नमः

मंत्र

ॐ मधुरूपायै नमः

मंत्र

ॐ महोत्कटायै नमः

मंत्र

ॐ महासूक्ष्मायै नमः

मंत्र

ॐ महाशान्तायै नमः

मंत्र

ॐ मुनिस्तुतायै नमः

मंत्र

ॐ मोहहन्त्र्यै नमः

मंत्र

ॐ माधव्यै नमः

मंत्र

ॐ माधवप्रियायै नमः

मंत्र

ॐ मायायै नमः

मंत्र

ॐ महादेवसंस्तुत्यायै नमः

मंत्र

ॐ महाकाल्यै नमः

मंत्र

ॐ योगीशफलदायिन्यै नमः

मंत्र

ॐ यक्षपूज्यायै नमः

मंत्र

ॐ यज्ञतुष्टायै नमः

मंत्र

ॐ यन्त्राराध्यायै नमः

मंत्र

ॐ यन्त्रकर्तृप्रियङ्कर्यै नमः

मंत्र

ॐ योगिध्यानपरायणायै नमः

मंत्र

ॐ यमस्तुत्यायै नमः

मंत्र

ॐ यशस्कर्यै नमः

मंत्र

ॐ योगबद्धायै नमः

मंत्र

ॐ यमबाधाविनाशिन्यै नमः

मंत्र

ॐ योगिकाम्यप्रदात्र्यै नमः

मंत्र

ॐ ह्रीं गुरुरूपे मां गृह्ण ऐं वद वद वाग्वादिनि स्वाहा

दक्षिण रक्षा

ॐ ऐं श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै बुधजनन्यै स्वाहा दक्षिणे मां सदाऽवतु। (अर्थ: ज्ञानियों की माता दक्षिण दिशा में रक्षा करें) 8

नेत्र रक्षा मन्त्र

ॐ श्रीं ह्रीं भगवत्यै स्वाहा नेत्रयुग्मं सदाऽवतु। (स्वरूप: भगवती | लाभ: नेत्रों और सूक्ष्म दृष्टि की रक्षा | अर्थ: श्रीं ह्रीं स्वरूपा भगवती मेरे दोनों नेत्रों की रक्षा करें) 8

नासिका रक्षा मन्त्र

ॐ ह्रीं वाग्वादिन्यै स्वाहा नासां मे सर्वतोऽवतु। (स्वरूप: वाग्वादिनी | लाभ: प्राण-वायु और नासिका की रक्षा | अर्थ: वाग्वादिनी नासिका की सभी प्रकार से रक्षा करें) 8

ओष्ठ रक्षा मन्त्र

ह्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा ओष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: होठों और उच्चारण स्थान की रक्षा | अर्थ: विद्या की अधिष्ठात्री देवी मेरे होंठों की सदा रक्षा करें) 8

दंत रक्षा मन्त्र

ॐ श्रीं ह्रीं ब्राह्म्यै स्वाहेति दन्तपङ्क्तीः सदाऽवतु। (स्वरूप: ब्राह्मी | लाभ: दाँतों और स्पष्ट वाचन-स्थान की रक्षा | अर्थ: ब्राह्मी देवी मेरी दंत-पंक्तियों की सदा रक्षा करें) 8

कंठ रक्षा मन्त्र

ऐमित्येकाक्षरो मन्त्रो मम कण्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: एकाक्षरी बीज | लाभ: कंठ, स्वर-तंत्र और विशुद्धि चक्र की रक्षा, संगीतकारों के लिए अति उत्तम | अर्थ: 'ऐं' रूपी एकाक्षर मन्त्र मेरे कंठ की सदा रक्षा करे) 8

ग्रीवा-स्कंध रक्षा मन्त्र

ॐ श्रीं ह्रीं पातु मे ग्रीवां स्कन्धं मे श्रीं सदाऽवतु। (स्वरूप: श्रीं ह्रीं स्वरूपा | लाभ: गर्दन और कंधों की रक्षा | अर्थ: देवी मेरी ग्रीवा और स्कंध की रक्षा करें) 8

वक्ष रक्षा मन्त्र

श्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा वक्षः सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: हृदय व वक्ष-स्थल की रक्षा | अर्थ: विद्या देवी मेरे वक्ष की रक्षा करें) 8

नाभि रक्षा मन्त्र

ॐ ह्रीं विद्यास्वरूपायै स्वाहा मे पातु नाभिकाम्। (स्वरूप: विद्यास्वरूपा | लाभ: नाभि, मणिपूर चक्र और नाद के उद्गम स्थान 'पश्यन्ती' वाक् की रक्षा | अर्थ: विद्यास्वरूपा मेरी नाभि की रक्षा करें) 8

पृष्ठ रक्षा मन्त्र

ॐ ह्रीं क्लीं वाण्यै स्वाहेति मम पृष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: वाणी | लाभ: पीठ और मेरुदंड की रक्षा | अर्थ: वाणी मेरी पीठ की सदा रक्षा करें) 8

पाद रक्षा मन्त्र

ॐ सर्ववर्णात्मिकायै पादयुग्मं सदाऽवतु। (स्वरूप: सर्ववर्णात्मिका | लाभ: दोनों पैरों की रक्षा | अर्थ: समस्त अक्षर-स्वरूपा देवी मेरे पैरों की रक्षा करें) 8

सर्वांग रक्षा मन्त्र

ॐ वागधिष्ठातृदेव्यै सर्वाङ्गं मे सदाऽवतु। (स्वरूप: वागधिष्ठात्री | लाभ: संपूर्ण शरीर की आध्यात्मिक और भौतिक रक्षा | अर्थ: वाक् की अधिष्ठात्री देवी मेरे संपूर्ण अंगों की रक्षा करें) 8

मंत्र

प्राची

आग्नेय रक्षा

ॐ ह्रीं जिह्वाग्रवासिन्यै स्वाहाऽग्निदिशि रक्षतु। (अर्थ: जिह्वाग्र में बसने वाली देवी आग्नेय कोण में रक्षा करें) 8

श्रोत्र रक्षा मन्त्र

ॐ सरस्वत्यै स्वाहेति श्रोत्रं पातु निरन्तरम्। (स्वरूप: सरस्वती | लाभ: कानों, श्रवण-शक्ति व नाद-ग्रहण की रक्षा | अर्थ: सरस्वती मेरे कानों की निरंतर रक्षा करें) 8

नैऋत्य रक्षा

ॐ ह्रीं श्रीं त्र्यक्षरो मन्त्रो नैर्ऋत्यां मे सदाऽवतु। (अर्थ: त्र्यक्षरी मन्त्र नैऋत्य कोण में रक्षा करे) 8

पश्चिम रक्षा

कविजिह्वाग्रवासिन्यै स्वाहा मां वारुणेऽवतु। (अर्थ: कवियों की जिह्वा में बसने वाली देवी पश्चिम में रक्षा करें) 8

वायव्य रक्षा

ॐ सदाम्बिकायै स्वाहा वायव्ये मां सदाऽवतु। (अर्थ: सदाम्बिका देवी वायव्य कोण में रक्षा करें) 8

उत्तर रक्षा

ॐ गद्यपद्यवासिन्यै स्वाहा मामुत्तरेऽवतु। (अर्थ: गद्य-पद्य में निवास करने वाली देवी उत्तर में रक्षा करें) 8

ईशान रक्षा

ॐ सर्वशास्त्रवासिन्यै स्वाहैशान्यां सदाऽवतु। (अर्थ: सभी शास्त्रों में बसने वाली देवी ईशान कोण में रक्षा करें) 8

मंत्र

ऊर्ध्व

मंत्र

अधः

सर्वदिशि रक्षा

ॐ ग्रन्थबीजरूपायै स्वाहा मां सर्वतोऽवतु। (अर्थ: ग्रंथों का बीज रूप देवी मेरी सभी दिशाओं से रक्षा करें) 8

ब्रह्मपुत्री गायत्री

ॐ सरस्वत्यै च विद्महे ब्रह्मपुत्र्यै च धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्॥

कामराज विद्या गायत्री

ॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे कामराजाय धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्॥

ब्रह्मपत्नी गायत्री

ॐ वाग्देव्यै च विद्महे ब्रह्मपत्न्यै च धीमहि। तन्नो वाणी प्रचोदयात्॥

शारदा वंदना (विद्यारम्भ)

सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि। विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥

श्री सरस्वती बीज मन्त्र

ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः

महो अर्णः सरस्वती

महो अर्णः सरस्वती प्रचेतयति केतुना। धियो विश्वा विराजति॥

उत स्या नः सरस्वती

उत स्या नः सरस्वती घोरा हिरण्यवर्तनिः। वृत्रघ्नी वष्टि सुष्टुतिम्॥

त्वं देवि सरस्वत्यवा

त्वं देवि सरस्वत्यवा वाजेषु वाजिनि। रदा पूषेव नः सनिम्॥

ॐ यश्छन्दसामृषभो (मेधा सूक्त)

ॐ यश्छन्दसामृषभो विश्वरूपः। छन्दोभ्योऽध्यमृतात्सम्बभूव। स मेन्द्रो मेधया स्पृणोतु। अमृतस्य देव धारणो भूयासम्॥

ॐ मेधा देवी जुषमाणा

ॐ मेधा देवी जुषमाणा न आगाद्विश्वाची भद्रा सुमनस्यमाना। त्वया जुष्टा नुदमाना दुरुक्तान बृहद्वदेम विदथे सुवीराः॥

मयि मेधां मयि प्रज्ञां

मयि मेधां मयि प्रजां मय्यग्निस्तेजो दधातु। मयि मेधां मयि प्रजां मयीन्द्र इन्द्रियं दधातु। मयि मेधां मयि प्रजां मयि सूर्यो भ्राजो दधातु॥

शृतं मे मा प्रहासीः

ॐ शृतं मे मा प्रहासीः अनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधामि ऋतं वदिष्यामि सत्यं वदिष्यामि। तन्मामवतु तद्वक्तारमवतु अवतु मामवतु वक्तारमवतु वक्तारम्। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

आ नो दिवो बृहतः

आ नो दिवो बृहतः पर्वतादा सरस्वती यजता गन्तु यज्ञम्। हवं देवी जुजुषाणा घृताची शग्मां नो वाचमुशती शृणोतु॥

पावका नः सरस्वती (सरस्वती सूक्त)

पावका नः सरस्वती वाजेभिर्वाजिनीवती। यज्ञं वष्टु धियावसुः॥

चोदयित्री सूनृतानां

चोदयित्री सूनृतानां चेतन्ती सुमतीनाम्। यज्ञं दधे सरस्वती॥

व्यक्ताव्यक्तगिरः (सौः बीज मन्त्र)

व्यक्ताव्यक्तगिरः सर्वे वेदाद्या व्याहरन्ति याम्। सर्वकामदुघा धेनुः सा मां पातु सरस्वती॥ सौः देवीं वाचमजनयन्त देवास्ता विश्वरूपाः पशवो वदन्ति। सा नो मन्द्रेषमूर्जं दुहाना धेनुर्वागस्मानुपसुष्टुतैतु॥

सरस्वती मूल बीज (एकाक्षरी मन्त्र)

ऐं (Aim)

या कुन्देन्दु तुषारहार (अगस्त्य रचित)

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥ या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥

समृद्धि-विद्या मन्त्र

ॐ श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै नमः

वाग्देवी एकाग्रता मन्त्र

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः

मुख कमल वासिनी मन्त्र

ॐ अर्हं मुख कमल वासिनी पापात्म क्षयम् कारी वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा।

वद वद वाग्वादिनी मन्त्र

वद वद वाग्वादिनी स्वाहा। (अथवा ॐ नमो भगवती वद वद वाग्देवी स्वाहा)

नीलांजना सरस्वती मन्त्र

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं नीलांजना समाभास्वरूपिणी। या स्वाहा

महादेव्यै सरस्वती मन्त्र

ॐ श्रीं महादेव्यै सरस्वत्यै स्वाहा

क्लीं सौः सम्पुटित मन्त्र

ॐ ऐं क्लीं सौः।

जिह्वाग्रे वासिनी मन्त्र (सरस्वती स्तवराज)

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं वद वद वाग्वादिनी मम जिह्वाग्रे सरस्वती स्वाहा।

पद्मासने शब्दरूपे मन्त्र

ॐ पद्मासने शब्दरूपे ऐं ह्रीं क्लीं वद वद वाग्वादिनी स्वाहा।

प्रज्ञावर्धन मन्त्र

ॐ नमो भगवति सरस्वति परमेश्वरि। वाग्वादिनि मम विद्यां देहि भगवति। भंसवाहिनि हंससमारूढे बुद्धिं देहि देहि। प्रज्ञां देहि देहि विद्यां परमेश्वरि सरस्वति स्वाहा॥

शिरो रक्षा मन्त्र

ॐ ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा शिरो मे पातु सर्वतः। (स्वरूप: ह्रीं-स्वरूपा सरस्वती | लाभ: मस्तिष्क और सहस्रार चक्र की सभी दिशाओं से रक्षा | अर्थ: ह्रीं बीज रूपी सरस्वती मेरे सिर की सब ओर से रक्षा करें) 8

भाल रक्षा मन्त्र

श्रीं वाग्देवतायै स्वाहा भालं मे सर्वदाऽवतु। (स्वरूप: वाग्देवता | लाभ: मस्तक, आज्ञा चक्र व विचार-केंद्र की रक्षा | अर्थ: श्रीं बीज रूपी वाग्देवता मेरे ललाट की सदा रक्षा करें) 8

मंत्र

ॐ विनिद्रायै नमः

मंत्र

ॐ मन्त्रगध्यायै नमः

मंत्र

ॐ अज्ञाननाशिन्यभीष्टदायै नमः

मंत्र

ॐ जाड्यविध्वंसनकर्त्र्यै नमः

मंत्र

ॐ चतुर्वर्गफलप्रदायै नमः

मंत्र

ॐ हंसासनायै नमः

मंत्र

ॐ श्रुतिरूपायै नमः

मंत्र

ॐ वीणावादनतत्परायै नमः

मंत्र

ॐ शब्दब्रह्मस्वरूपिण्यै नमः

मंत्र

ॐ सर्गस्थित्यन्तकारिण्यै नमः

मंत्र

ॐ रूपसौभाग्यदायिन्यै नमः

मंत्र

ॐ सुरासुरनमस्कृतायै नमः

मंत्र

ॐ त्रिकालज्ञायै नमः

मंत्र

ॐ भुवनेश्वर्यै नमः

मंत्र

ॐ सुनासायै नमः

मंत्र

ॐ सुधामूर्त्यै नमः

मंत्र

ॐ सौदामिन्यै नमः

मंत्र

ॐ गोविन्दायै नमः

मंत्र

ॐ भामायै नमः

मंत्र

ॐ महाबलायै नमः

मंत्र

ॐ दिव्याङ्गायै नमः

मंत्र

ॐ महोत्साहायै नमः

मंत्र

ॐ मालिन्यै नमः

मंत्र

ॐ महाश्रयायै नमः

मंत्र

ॐ शिवानुजायै नमः

मंत्र

ॐ विमलायै नमः

बुद्धिं देहि यशो देहि

बुद्धिं देहि यशो देहि कवित्वं देहि देहि मे। मूढत्वं च हरेद्देवि त्राहि मां शरणागतम्॥

दोर्भिर्युक्ता चतुर्भिः (अगस्त्य रचित)

दोर्भिर्युक्ता चतुर्भिः स्फटिकमणिनिभैरक्षमालान्दधाना। हस्तेनैकेन पद्मं सितमपि च शुकं पुस्तकं चापरेण॥ भासा कुन्देन्दुशङ्खस्फटिकमणिनिभा भासमानाऽसमाना। सा मे वाग्देवतेयं निवसतु वदने सर्वदा सुप्रसन्ना॥

सरस्वती महाभागे

सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचने। विद्यारूपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोऽस्तु ते॥

कृपां कुरु जगन्मातर् (याज्ञवल्क्य कृत)

कृपां कुरु जगन्मातर्मामेवं हततेजसम्। गुरुशापात्स्मृतिभ्रष्टं विद्याहीनं च दुःखितम्॥

ज्ञानं देहि स्मृतिं देहि (याज्ञवल्क्य कृत)

ज्ञानं देहि स्मृतिं देहि विद्यां देहि देवते। प्रतिष्ठां कवितां देहि शक्तिं शिष्यप्रबोधिकाम्॥

ब्रह्मस्वरूपा परमा (याज्ञवल्क्य कृत)

ब्रह्मस्वरूपा परमा ज्योतिरूपा सनातनी। सर्वविद्याधिदेवी या तस्यै वाण्यै नमो नमः॥

नमस्ते शारदे देवि (आदि शंकराचार्य कृत)

नमस्ते शारदे देवि काश्मीरपुरवासिनि। त्वामहं प्रार्थये नित्यं विद्यादानं च देहि मे॥

या श्रद्धा धारणा मेधा (आदि शंकराचार्य कृत)

या श्रद्धा धारणा मेधा वाग्देवी विधिवल्लभा। भक्तजिह्वाग्रसदना शमादिगुणदायिनी॥

भद्रकाल्यै नमो नित्यं (आदि शंकराचार्य कृत)

भद्रकाल्यै नमो नित्यं सरस्वत्यै नमो नमः। वेदवेदाङ्गवेदान्तविद्यास्थानेभ्य एव च॥

नील सरस्वती मूल मन्त्र

ह्रीं स्त्रीं हूँ (Hreem Streem Hoom)

घोर रूपे महारावे

घोर रूपे महारावे सर्वशत्रु भयङ्करि। भक्तेभ्यो वरदे देवि त्राहि मां शरणागतम्॥

जटाजूटसमायुक्ते

जटाजूटसमायुक्ते लोलजिह्वान्तकारिणी। द्रुतबुद्धिकरे देवि त्राहि मां शरणागतम्॥

वं ह्रूं ह्रूं कामये देवि

वं ह्रूं ह्रूं कामये देवि बलिहोमप्रिये नमः। उग्रतारे नमो नित्यं त्राहि मां शरणागतम्॥

सरस्वती प्रार्थना घनपाठ

देवीं सरस्वतीं सरस्वतीं देवीं देवीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजेभिस्सरस्वतीं देवीं देवीं सरस्वतीं वाजेभिः॥ सरस्वतीं वाजेभिर्वाजेभिस्सरस्वतीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजिनीवतीं वाजिनीवतीं वाजेभिस्सरस्वतीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजिनीवतीं॥ वाजेभिर्वाजिनीवतीं वाजिनीवतीं वाजेभिर्वाजेभिर्वाजिनीवतीं। वाजिनीवतीति वाजिनी-वती॥

सदानन्दमयी तारा

ॐ श्रीं ह्रीं ह्स्सौः हूँ फट् नील सरस्वत्यै स्वाहा।

मंत्र

ॐ भारत्यै नमः

मंत्र

ॐ सरस्वत्यै नमः

मंत्र

ॐ शारदा देव्यै नमः

मंत्र

ॐ हंसवाहिन्यै नमः

मंत्र

ॐ जगतीख्यातायै नमः

मंत्र

ॐ वाणीश्वर्यै नमः

मंत्र

ॐ कुमार्यै नमः

मंत्र

ॐ ब्रह्मचारिण्यै नमः

मंत्र

ॐ बुद्धिदात्र्यै नमः

मंत्र

ॐ वरदायिन्यै नमः

मंत्र

ॐ क्षुद्रघण्टायै नमः