शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
व्यक्ताव्यक्तगिरः (सौः बीज मन्त्र)
व्यक्ताव्यक्तगिरः सर्वे वेदाद्या व्याहरन्ति याम्। सर्वकामदुघा धेनुः सा मां पातु सरस्वती॥ सौः देवीं वाचमजनयन्त देवास्ता विश्वरूपाः पशवो वदन्ति। सा नो मन्द्रेषमूर्जं दुहाना धेनुर्वागस्मानुपसुष्टुतैतु॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकार'सौः' बीज सम्पुटित विद्या मन्त्र
स्वरूपसर्वकामदुघा धेनु (सभी इच्छाएं पूर्ण करने वाली कामधेनु रूपा सरस्वती)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
वेद आदि समस्त ग्रंथ व्यक्त और अव्यक्त रूप से जिनका गान करते हैं, वे सभी कामनाएँ पूर्ण करने वाली कामधेनु रूपी सरस्वती मेरी रक्षा करें। देवताओं ने जिस वाग्देवी को उत्पन्न किया, वह आनंदमयी, अन्न और ऊर्जा देने वाली वाग्देवी हमारी स्तुति से प्रसन्न होकर हमारे पास आयें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति, स्पष्ट और गूढ़ दोनों प्रकार की वाणी की सिद्धि
विस्तृत लाभ
समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति, स्पष्ट और गूढ़ दोनों प्रकार की वाणी की सिद्धि।
जप काल
वाक्-सिद्धि साधना के समय।
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