या कुन्देन्दु तुषारहार (अगस्त्य रचित)
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥ या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इस मंत्र का अर्थ
जो कुंद के फूल, चंद्रमा, और बर्फ के हार की तरह श्वेत हैं, जो वीणा और दंड धारण किए हुए हैं, जिनकी त्रिदेव सदा पूजा करते हैं, वे मेरी पूर्ण जड़ता को दूर कर मेरी रक्षा करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
संपूर्ण जड़ता (मूर्खता) का नाश, शुद्ध ज्ञान का उदय
विस्तृत लाभ
संपूर्ण जड़ता (मूर्खता) का नाश, शुद्ध ज्ञान का उदय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये सर्ववेदशाखासांख्यपुराणात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ धनुर्वेदाय नमः
अस्य घा वीर ईवतोऽग्नेरीशीत मर्त्यः । तिग्मजम्भस्य मीळ्हुषः ॥
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्माकं दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ।
ॐ श्रीकृष्णाय नमः
अशोकवृक्षवल्लरीवितानमण्डपस्थिते प्रवालबालपल्लवप्रभारुणाङ्घ्रिकोमले। वराभयस्फुरत्करे प्रभूतसम्पदालये कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥