शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
या कुन्देन्दु तुषारहार (अगस्त्य रचित)
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥ या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारध्यान स्तोत्र मन्त्र
स्वरूपश्वेतपद्मासना
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो कुंद के फूल, चंद्रमा, और बर्फ के हार की तरह श्वेत हैं, जो वीणा और दंड धारण किए हुए हैं, जिनकी त्रिदेव सदा पूजा करते हैं, वे मेरी पूर्ण जड़ता को दूर कर मेरी रक्षा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
संपूर्ण जड़ता (मूर्खता) का नाश, शुद्ध ज्ञान का उदय
विस्तृत लाभ
संपूर्ण जड़ता (मूर्खता) का नाश, शुद्ध ज्ञान का उदय।
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