ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

आ नो दिवो बृहतः

आ नो दिवो बृहतः पर्वतादा सरस्वती यजता गन्तु यज्ञम्। हवं देवी जुजुषाणा घृताची शग्मां नो वाचमुशती शृणोतु॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारआह्वान मन्त्र
स्वरूपदेवी सरस्वती
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

महान द्युलोक और पर्वत से पूजनीय सरस्वती हमारे इस यज्ञ में पधारें। हमारे आह्वान का प्रसन्नतापूर्वक सेवन करती हुई वे देवी हमारी कल्याणकारी स्तुति को सुनें।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

मनोवांछित फल की प्राप्ति, अनुष्ठान में देवी का प्रत्यक्ष सान्निध्य

विस्तृत लाभ

मनोवांछित फल की प्राप्ति, अनुष्ठान में देवी का प्रत्यक्ष सान्निध्य।

जप काल

सरस्वती अनुष्ठान में अभिषेक एवं न्यास के समय।

इसे भी पढ़ें

अन्य देवताओं के मंत्र

प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र